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Articles & Reports

The Digital financial consumer
The online world offers plenty of information and these days there are apps and sites through which I am investing as well as managing my money efficiently.Services industry is slowly changing the way financial services are consumed. For 27-year-old, Delhi-based Ankit Agarwal, managing money on his smartphone is similar to managing every other aspect of his life. “I use the digital interface to bank; track my investment performance, pay Bills and compare financial products before buying them,” he says. A cursory look on his smartphone shows several apps dedicated to managing his finances, which he says are very handy and reliable.
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Curbing MIS Selling
I have been associated with the insurance industry for over three decades and have witnessed both the pre- and post-liberalisation phase of the industry. Yes, the opening of the sector about 15 years ago was a welcome step, but inadvertently it also opened the doors to practices by insurance companies that have left a rather poor image of all insurers.
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अपने छोटे-छोटे प्रयासों से बचा सकते हैं एक बड़ी राशि
अपने वित्तीय लक्ष्यों एवं उसे प्राप्त करने के तरीकों से आप भली-भांति अवगत हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए बहुत पहले बचत की आदत डालने की ज़रुरत होती है। भविष्य की आपात स्थितियों से निबटने के लिए बैंक-बैलेंस बढ़ाना, सार्वजनिक भविष्य निधि में निवेश के साथ-साथ समस्त कर्ज़ों को जल्द से जल्द चुकाने की आवश्यकता है। लेकिन समस्या यह है कि हमारे देश में अधिकांश लोग बीमा निवेश को इस रूप में नहीं देखते, वे बीमा को एक ऐसे व्यय के रूप में देखते हैं जिससे बचा जा सकता है। यहाँ तक कि आर्थिक रूप से संपन्न लोग जो प्रीमियम का भुगतान आसानी से कर सकते हैं, बीमा खरीदना ज़रूरी नहीं समझते।
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INDIA: INSURANCE @ DIGITAL - 20TIMES BY 2020
• By 2020, 3 out of 4 insurance policies will be influenced online
• Internet, mobile & social media are helping create the popularity for digital insurance like never before
• Digital is becoming a core part of increasing number of consumers across India
• The megatrend is growing exponentially
• Digital has disrupted sectors after sectors from travel, commerce, music to publishing etc.
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दन्त बीमा पॉलिसी
स्वास्थ्य बीमा की तरह हीं दन्त बीमा एक प्रकार की पॉलिसी है जिसका उद्देश्य दाँतों से सम्बंधित किसी बीमारी के इलाज़ में बीमित व्यक्ति के आर्थिक बोझ को कम करना है। दन्त बीमा पॉलिसी की एक प्रमुख विशेषता है जो इसे स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से अलग बनाती है वो यह कि स्वास्थ्य बीमा की तरह यह सिर्फ़ गंभीर ज़ख्म या बीमारी में हीं नहीं बल्कि सामान्य एवं निवारक दंत चिकित्सा उपचार का भी सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

हालांकि पश्चिमी देशों की तरह भारत में दन्त बीमा को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता लेकिन अब कुछ कंपनियों द्वारा प्लान लांच किये जाने के साथ धीरे-धीरे अब जागरूकता बढ़ रही है। आमतौर पर भारत में दन्त चिकित्सा को सामान्य स्वास्थ्य बीमा के साथ हीं कवर किया जाता है।
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बनायें बीमा क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य
भारत में बीमा बाज़ार वर्ष 1999-2000 में निज़ी कम्पनियों के लिए खोल देने के बाद से इस क्षेत्र में काफी तेजी से विकास हो रहा है। इसके पहले बीमा व्यवसाय पर सरकारी क्षेत्र की कम्पनियों का एकाधिकार था। एक तरफ जीवन बीमा व्यवसाय पर जहाँ भारत की सबसे बड़ी बीमा कम्पनी 'भारतीय जीवन बीमा निगम' एक मात्र कम्पनी थी वहीं जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में सरकारी क्षेत्र की चार बीमा कम्पनियाँ- नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी लि., ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लि., दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लि. और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लि. का बाज़ार पर एकाधिकार था।

भारत में बीमा बाज़ार प्रगतिशील है। वर्तमान में देश के अंदर सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्र की लगभग चार दर्ज़न बीमा कंपनियां (लाईफ़, नॉन-लाईफ़ एवं हेल्थ) कार्य कर रही है।
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Calculation of TDS on salary for FY 2013-14 /AY 2014-15
Tax Deducted at Source (TDS) is one of the ways of collecting income tax in India, regulated under the Indian Income Tax Act-1961, and managed by the Central Board of Direct Taxes (CBDT).

Calculating TDS has always been a tedious job both for the employer and the employees. A certain percentage of amounts are deducted by the employer at the time of crediting payment to the employees, and the deducted amounts are remitted to the Government account. The concept of TDS conceives of the principle of 'you should pay for the sake of the nation as you earn'.
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रखें बीमा धारकों की ज़रूरतों का ख्य़ाल, बनें एक सफ़ल बीमा एजेंट
अगर आप एक बीमा एजेंट हैं या इस क्षेत्र में करियर बनाने की सोंच रहे हैं, तो आपके लिए आवश्यक कुछ ऐसी विशेषताएँ हैं जो आपके करियर को सफलता की ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए बेहद ज़रूरी है। समुचित जानकारी के अभाव में बीमा एजेंट ग़लत पॉलिसियाँ बेंच देते हैं जिससे ज़रूरत पड़ने पर पॉलिसीधारकों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती। लाखों पॉलिसीधारक इंश्योरेंस मिस-सेलिंग के शिकार हो रहे हैं। फलस्वरूप, बीमा एजेंट पर से बीमा धारकों का विश्वास उठने लगता है।

बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आई आर डी ए) ने भी इंश्योरेंस मिस-सेलिंग को लेकर गहरी चिंता ज़ाहिर की है। सिर्फ़ वित्तीय वर्ष 2012-13 में आई आर डी ए को मिस-सेलिंग से सम्बंधित एक लाख शिकायतें प्राप्त हुई है। मिस-सेलिंग पर लगाम लगाने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने देश के 25 लाख से अधिक बीमा एजेंटों को प्रशिक्षण देने पर विचार कर रहा है।
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Know about Insurance Repository System
Recently, the Union Finance Minister, Mr. P. Chidambaram has launched IRDA's Insurance Repository System (IRS), the first of its kind in the world. Such facility in insurance sector had been sought for a long time. Like shares and bonds, which are being kept in a demat account with a depository, now with IRS, the policyholders can be able to keep their insurance policies in an electronic insurance account with an insurance repository. With e-insurance account, policyholders will not require to keep traditional paper documents.
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लैप्स बीमा पॉलिसियों को कैसे करें चालू
बीमा का लैप्स होना एक बहुत हीं सामान्य बात है। आमतौर पर प्रीमियम के वार्षिक या छमाही भुगतान के मामले में नियत तारीख से 30 दिनों तक प्रीमियम का भुगतान किया जा सकता है जबकि तिमाही प्रीमियम भुगतान के मामले में यह अवधि 15 दिनों की होती है। यानि, उक्त ग्रेस-पीरियड के अंदर बिना किसी पेनाल्टी के प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। इस अवधि के दौरान आपकी पॉलिसी चालू रहती है। लेकिन, इस अवधि के समाप्त होने के बाद पॉलिसी लैप्स हो जाती है और लैप्स पॉलिसी पर आप किसी तरह का क्लेम नहीं कर सकते।

मुख्य रूप से जीवन बीमा पॉलिसियाँ दो प्रकार के होते हैं। पहला, टर्म प्लान जो एक साधारण बीमा पॉलिसी है जिसके अंतर्गत सिर्फ़ जोख़िम कवर होता है और इसमें कोई निवेश नहीं होता।
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Indian Insurers to offer life insurance cover to HIV /AIDS patients
The Insurance Regulatory and Development Authority (IRDA) of India has asked insurers to provide life insurance cover to people living with HIV/AIDS (PLHA) from April 1, 2014. However, the insurers said that the lack of proper data about the ailment will be a hurdle in determining the premiums of the product.

In the draft guidelines last week, the regulator said that the board-approved underwriting policy should be kept in place by all insurance companies.
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कुछ बीमा पॉलिसियां जो आपको ज़रूर लेनी चाहिए
अपनी सबसे महत्वपूर्ण सम्पत्तियों एवं आय को सुरक्षित करना ठोस आर्थिक प्लानिंग की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। उचित बीमा पॉलिसियां आपकी इस उद्देश्य को पूरा करने में आपकी मदद करते हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि उनके प्रियज़नों का भविष्य सुनिश्चित हो। उनके नहीं रहने के बाद भी उनके आश्रित माता-पिता, बच्चे एवं पति/पत्नी की जीवन-शैली प्रभावित नहीं हो। इसलिए, हर व्यक्ति को चाहिए कि वे कम-से-कम पाँच बीमा पॉलिसियां - टर्म बीमा, दुर्घटना बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा, गृहस्वामी बीमा एवं वाहन बीमा अवश्य लें।

1. टर्म बीमा पॉलिसी: टर्म बीमा या टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी एक विशुद्ध ज़ोखिम कवर प्लान है जो एक निश्चित समय के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। अगर, बीमाधारक की मृत्यु उस समयावधि के अन्दर हो जाती है तो उसके नॉमिनी (लाभार्थी) को बीमा कंपनी निर्धारित बीमा-राशि की भुगतान करती है।
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व्यवसाय शुरू करने के लिए कैसे करें 'बिज़नेस लोन' का आवेदन
'धन से धन कमाया जाता है' - यह अर्थशास्त्र की एक बहुत पुरानी कहावत है, जिसका अभिप्राय यह है कि जितना अधिक धन आपके पास होगा, उतना हीं अधिक धन कमा पाना आपके लिए आसान होगा। इससे यह बिल्कुल साफ़ है कि किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए 'पूँजी' बहुत हीं अहम कारक है; चाहे आपका व्यवसाय एक स्थापित संस्था हो या आप एक नए ज़माने के उद्यमी हैं और किसी नये व्यवसाय की शुरुआत करने जा रहें हैं। किसी भी नये व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए न सिर्फ़ कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है, बल्कि; कार्यालय के लिए स्थान, कर्मचारियों के वेतन हेतु और अन्य विविध खर्चों जैसे - बिजली और टेलीफोन के बिल आदि के लिए भी पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे अनेक छुपे हुए खर्चों एवं व्यापार को सुचारू रूप से संचालन के लिए ‘बिज़नेस स्टार्ट-अप लोन' हर आकार के बिज़नेस (बड़े, मध्यम या छोटे) के अनुरूप उपलब्ध है।
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Some DO's and DON'Ts while buying life insurance
life insurance policy is an agreement between a life insured and an insurance company,in which the insurance company agrees to pay a certain amount of money called benefits either on the death of the life insured or after a set of period in exchange of premiums paid by the policyholder. Despite understanding the need of life insurance,people always find difficulties choosing the right products. This is one of those areas of personal finance that people most misunderstand. Generally, a life insurance policy is bought based on the needs and the investment potential of the policyholder.Hence, you choose to buy life insurance policy to protect your loved ones even after your lifetime, you should be extra careful while buying it.
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अपनी जीवन बीमा की ज़रूरतों की गणना इस प्रकार करें !
'टर्म इंश्योरेंस' यानि 'जीवन बीमा' पॉलिसी की आवश्यकताओं को लोग भली-भाँति समझते हैं ; लेकिन, अधिकतर लोग एक समुचित बीमा राशि की गणना कर पाने में अपने आप को असमर्थ पाते हैं । अपनी बीमा ज़रूरतों की सही गणना करना एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है। अगर आपकी जीवन बीमा पॉलिसी उपयुक्त कवर- राशि की न हो तो जीवन बीमा पॉलिसी की मूलभूत उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पाती । इसलिए, पॉलिसी लेने के पहले अपनी जीवन बीमा की ज़रुरतों की गणना कर लेनी चाहिए। गणना का आधार आपकी खर्च करने की क्षमता नहीं बल्कि, दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में आपके परिवार की आवश्यकताएँ होनी चाहिए; जोकि जीवन बीमा पॉलिसी की मौलिक अवधारणा है ।
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Few things you must know before buying a health insurance policy in India
'Health is Wealth' is an old saying, which depicts that good health is as important as having lots of wealth. A person with good health can work efficiently to earn wealth and lead a quality life. On the other hand, a person who does not have good health spends a lot of his wealth to regain the health.According to an Arabic proverb,"He, who has health, has hope; and he, who has hope, has everything". All of these sayings imply that good health is of great importance, and it cannot be compromised.
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अंग्रेजी की अनिवार्यता बीमा व्यवसाय के विकास में रोड़ा !
किसी भी देश के विकास में उस देश की मातृ-भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अगर कार्यालय के काम-काज की भाषा आम जनता द्वारा बोली जाने वाली भाषा है तो तथ्यों की बारीकियों को समझना उनके लिए बेहद आसान हो जाता है। इससे समस्त क्रियान्वयन को गति मिलती है। यह इस तथ्य से प्रमाणित होता है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी ताजे आंकड़ों के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद की सूची में अमेरिका, चीन तथा जापान का स्थान क्रमशः पहला, दूसरा तथा तीसरा है। यहाँ यह बताने की कतई आवश्यकता नहीं है कि इन देशों की सरकारी भाषा यानि समस्त कार्य-कलापों की भाषा उन देशों की मातृ-भाषा क्रमशः अंग्रेजी, चीनी और जापानी है। लेकिन, चिंता का विषय यह है कि जनसँख्या की दृष्टि से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के बावज़ूद भारत इस सूची में दसवें स्थान पर है। अगर बीमा उद्योग की बात करें तो बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा भारतीय बीमा बाजाऱ को निजी कंपनियों के लिए खोलने के दस वर्षों के बाद भी लाईफ़ इंश्योरेंस की पहुँच लगभग 4 प्रतिशत लोगों तक हीं हो पायी है। नॉन-लाईफ़ इंश्योरेंस की स्थिति तो और भी दयनीय है।
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of solicitation
*This is based on the difference between the highest and lowest premium's for a single person, age 25, looking for an individual health policy with the sum insured of Rs. 5 lakhs.
**This is based on the difference between the highest and lowest premium's for a single person, age 25, looking for a term plan, with the sum insured of Rs. 30 lakhs, and the premium paying term of 30 years.
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